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भूतपूर्व
परीक्षा-2012 हेतु आन-लाइन आवेदन की सुविधा
निम्नांकित प्रतिबन्धों के साथ अनुमन्य है-
क. त्रिवर्षीय पाठ्यक्रमों की कक्षाओं हेतु
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प्रथम वर्ष कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के लिए वही
अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2007-08 से सत्र 2010-11 तक किसी सत्र में प्रथम
वर्ष कक्षा में संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में
सम्मिलित हुये हो।
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द्वितीय वर्ष कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के लिए वही
अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2006-07 से सत्र 2009-10 तक किसी सत्र में प्रथम
वर्ष कक्षा में संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में
सम्मिलित हुये हों।
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तृतीय वर्ष कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के लिए वही
अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2005-06 से सत्र 2008-09 तक किसी सत्र में प्रथम
वर्ष कक्षा में संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में
सम्मिलित हुये हों।
ख. द्विवर्षीय पाठ्यक्रमों की कक्षाओं हेतु
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प्रथम वर्ष कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के लिए वही
अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2008-09 से सत्र 2010-11 तक किसी सत्र में प्रथम
वर्ष कक्षा में संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में
सम्मिलित हुये हों।
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द्वितीय वर्ष कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के लिए वही
अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2007-08 से सत्र 2009-10 तक किसी सत्र में प्रथम
वर्ष कक्षा में संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में
सम्मिलित हुये हों।
ग. एक वर्षीय पाठ्यक्रमों की कक्षाओं हेतु
एक
वर्षीय पाठ्यक्रमों के अन्तर्गत किसी भी कक्षा की परीक्षा हेतु
ऑन-लाइन आवेदन के
लिए वही अभ्यर्थी पात्र होंगे जो सत्र 2009-10 या सत्र 2010-11 में संस्थागत
अभ्यर्थी के रूप में विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हुये हों।
घ. कोई अभ्यर्थी एक वर्ष में दो परीक्षाओं में सम्मिलित
नहीं हो सकता है। इसी प्रकार कोई भी छात्र एक वर्ष में दो कालेजों में संस्थागत एवं
भूतपूर्व छात्र नही हो सकता। भूतपूर्व छात्र अन्य फार्म, व्यक्तिगत अभ्यर्थी के रूप
में नहीं भर सकता है, ऐसा मामला प्रकाश में
आने पर सम्बन्धित छात्र की दोनों
परीक्षायें निरस्त कर दी जायेंगी तथा भविष्य में विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया
जायेगा।
ड. भूतपूर्व छात्र के रूप में वही विषय लिये जा सकते हैं
जो संस्थागत छात्र के रूप में थे परन्तु प्राचार्य की स्पष्ट संस्तुति पर
विश्वविद्यालय से पूर्व अनुमति लेकर केवल प्रथम/पूर्वार्द्ध परीक्षा में एक विषय
बदला जा सकता है।
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